नक़ली आँसू झूठी क़स्में सब पर्दे हैं नज़ाकत केबस बाज़ार लगे हैं जज़्बों के सौदे हैं शराफ़त केख़ुद-ग़रज़ी के हैं अल्फ़ाज़ मोहब्बत के अफ़साने मेंफिर भी लाते हैं चेहरे पर झूठे रंग इनायत के— arjun chamoli