Meaning of

ख़ुमार

khumaar • خمار

मदहोशी; नशा

intoxication; trance

خمار; نشہ

Arabic

ये कैसा नश्शा है मैं किस अजब ख़ुमार में हूँ तू आ के जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूँ — Muneer Niyazi
सच तो ये है 'मजाज़' की दुनिया हुस्न और इश्क़ के सिवा क्या है — Asrar Ul Haq Majaz
ख़ुमारी इस क़दर तेरी दिमाग़-ओ-दिल पे तारी है कि तेरे नाम के हर नाम को रिक्वेस्ट भेजी है — gulab muntazir
ऐसे भी लोग हैं यहाँ जो अपने नाम से महफ़िल में पढ़ के आ गए मक़्ता मजाज़ का — Gaurav Singh
इश्क़ में कैसे ये जान वारी गई फिर मिरे सर से कैसे खु़मारी गई — Jitendra "jeet"
बख़्शी हैं हम को इश्क़ ने वो जुरअतें 'मजाज़' डरते नहीं सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ से हम — Asrar Ul Haq Majaz
तेशे बग़ैर मर न सका कोहकन 'असद' सरगश्ता-ए-ख़ुमार-ए-रुसूम-ओ-क़ुयूद था — Mirza Ghalib
तड़पते रहे क़ब्र में लोग सारे जिन्हें बंदगी की ख़ुमारी नहीं थी — Reshma Shaikh
शराबों से ख़ुमारी आ रही है नशा तेरा उतरता जा रहा है — anupam shah

'ख़ुमार' शब्द एक आनंदमय मदहोशी की स्थिति का संकेत देता है, जहाँ वास्तविकता एक स्वप्निल धुंध में बदल जाती है। कविता में, यह अक्सर प्रेम के मोहक आकर्षण या सौंदर्य के मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्रभाव का प्रतीक होता है।

कवि 'ख़ुमार' का प्रयोग प्रेम के नशीले प्रभाव, जुनून के मीठे समर्पण, या सौंदर्य से उत्पन्न स्वप्निल अवस्था को जगाने के लिए करते हैं। यह अक्सर वास्तविकता की कठोरता के विपरीत होता है।

कविता की दुनिया में, 'ख़ुमार' सपनों की कोमल बाहों का आलिंगन है। यह मोह में खोए हृदय की मृदु फुसफुसाहट है।