Meaning of

ख़ैर-ख़्वाह

khair-khwah • محرم

सद्भावी; समर्थक

well-wisher; supporter

خیر خواہ; حامی

Persian

लानतें हों कि अब मुहर्रम में
तेरे जाने का ग़म सताता है

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कमी महसूस होती है तो ख़ुदस बात करता हूँ
यूँँ अरसे से भरम रक्खा हुआ है ख़ैर-ख़्वाही का

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मेरा तेरा ज़रा कम कहें
आप हम एक हैं हम कहें

उस के बिन ईद कब ईद है
इस को दस्वा मुहर्रम कहें

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वो और किसी के साथ मनाएगी इस दफा
मेरे लिए तो ईद मुहर्रम से कम नहीं

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तू बताएगा मुझे हिज्र का आलम 'हारून'
मेरी हर रात गुज़रती है मोहर्रम की तरह

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न आए वो हमें मिलने न आया फ़ोन इक उन का
हमारी ईद भी यारो मुहर्रम की तरह गुज़री

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देखा जो चाँद माह-ए-मुहर्रम का अर्श पर
आँखों ने ज़ेब-ए-तन किया अश्कों का पैरहन

धड़कन से दिल की आई सदा या हुसैन की
नौहा-कुनाँ है नौहा-सरा है हर अंजुमन

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तेरी उम्मीद की उम्मीद भी अब जा चुकी है
मुहर्रम की तरह ये ईद भी अब जा चुकी है

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लानतें हों कि अब मुहर्रम में
तेरे जाने का ग़म सताता है

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कमी महसूस होती है तो ख़ुदस बात करता हूँ
यूँँ अरसे से भरम रक्खा हुआ है ख़ैर-ख़्वाही का

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‘ख़ैर-ख़्वाह’ शब्द सद्भावना और शुभचिंतन की भावना को जगाता है। मूल रूप से यह उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जो दूसरों के लिए शुभकामनाएं रखता है, जिसकी नीयतें शुद्ध और सहायक होती हैं। कविता में, यह शब्द अक्सर उस मौन, अडिग समर्थन को दर्शाता है जो एक व्यक्ति दूसरे को प्रदान करता है, एक शांत उपस्थिति जो उत्थान और प्रोत्साहन देती है।

कवि अक्सर 'ख़ैर-ख़्वाह' का उपयोग एक मौन संरक्षक, एक मित्र के रूप में करते हैं जो बिना किसी मांग के खड़ा रहता है। यह समर्थन की स्पष्ट अभिव्यक्तियों के विपरीत है, सच्ची मित्रता की सूक्ष्मता को उजागर करता है। यह दूर से शुभकामनाएं देने वाले प्रेमी की छवि भी प्रस्तुत कर सकता है, एक उपस्थिति जो महसूस होती है लेकिन देखी नहीं जाती।

अपनी शांत गरिमा में, 'ख़ैर-ख़्वाह' निःस्वार्थ समर्थन के सार को समेटे हुए है। यह उन मौन बंधनों की याद दिलाता है जो हमें एक साथ रखते हैं।