देखा जो चाँद माह-ए-मुहर्रम का अर्श परआँखों ने ज़ेब-ए-तन किया अश्कों का पैरहनधड़कन से दिल की आई सदा या हुसैन कीनौहा-कुनाँ है नौहा-सरा है हर अंजुमन— Shajar Abbas