Meaning of

ग़म-ए-जानाँ

gham-e-jaanaan • غم جاناں

प्रिय का दुःख; प्रेम का दर्द

sorrow of the beloved; pain of love

محبوب کا غم; عشق کا درد

Persian

बिछड़ने का ग़म तुम को क्यूँँ है रहो ख़ुश कि आज़ाद हो तुम — Shubham Rai 'shubh'
शरीक-ए-ज़िंदगी अच्छी रहे अरमान ही होता ग़म-ए-जानाँ सिवा जीना कहाँ आसान ही होता — Manohar Shimpi

यह वाक्यांश उस गहरे, अक्सर कड़वे दुःख को दर्शाता है जो एकतरफा या खोए हुए प्रेम से जुड़ा होता है। कविता में, यह उस भावनात्मक उथल-पुथल और तड़प को पकड़ता है जो प्रिय की अनुपस्थिति या उदासीनता के साथ होती है। यह दुःख केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है, बल्कि प्रेम की परीक्षाओं का एक सार्वभौमिक अनुभव है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग अपनी भावनात्मक पीड़ा की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह हृदय की मौन पुकारों का रूपक है। यह वाक्यांश मिलन की खुशी के विपरीत है, प्रेम की द्वैतता को उजागर करता है।

ग़म-ए-जानाँ प्रेम की स्थायी जटिलता का प्रमाण है। यह हमें तड़प में छिपी सुंदरता की याद दिलाता है।