Meaning of

ग़ुबार

ghubaar • غبار

धूल; धुंध; उलझन

dust; haze; confusion

گرد; دھند; الجھن

Arabic

ग़ुबार-ए-वक़्त में अब किस को खो रही हूँ मैं ये बारिशों का है मौसम कि रो रही हूँ मैं — Shahnaz Parveen Sahar
मुझे तो उस का भीतरी ग़ुबार है निकालना सो आँख चूमता हूँ उस के होंठ चूमता नहीं — Siddharth Saaz
कितनी उजलत में दुनिया बनाई ख़ुदा कितने बच्चों को दुख मारे गुब्बारे हैं — Jagveer Singh
भला उन बच्चों को अच्छा लगेगा क्या जिन्हें तब दुनिया दिखती थी ग़ुबारे में — Amanpreet singh
ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे — Javed Akhtar
एक गुब्बारे की क़ीमत अब पता मुझ को चली एक गुम-सुम है खड़ा और एक रोता घर गया — Divya 'Kumar Sahab'
ग़ुबार-ए-ग़म नज़र से छट रहा है बहुत दिन बा'द आया ईद का दिन — shampa andaliib
ग़ुबार दिल में रहा ज़ख़्म भर नहीं पाया हुई थी बात मगर बात थी अधूरी सी — arjun chamoli

ग़ुबार धूल के हवा में घूमने की छवि को उभारता है, जो दृष्टि को धुंधला कर देता है और रहस्य की भावना पैदा करता है। कविता में, यह अक्सर उलझन या भावनात्मक उथल-पुथल का प्रतीक होता है, जहाँ विचारों के घूमने के बीच स्पष्टता खो जाती है।

कवि ग़ुबार का उपयोग एक परेशान मन की आंतरिक अराजकता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह समय के गुजरने का भी प्रतिनिधित्व कर सकता है, जहाँ यादें धुंधली हो जाती हैं। यह शब्द स्पष्टता और पवित्रता के विपरीत है, समझ के लिए संघर्ष को उजागर करता है।

ग़ुबार धुंधले भावनाओं और विचारों का सार पकड़ता है, हृदय की स्पष्टता पर एक काव्यात्मक परदा।