Meaning of

ग़ुबार-ए-वक़्त

ghubaar-e-waqt • غبار وقت

समय की धूल; अतीत के अवशेष

dust of time; remnants of past

وقت کی گرد; ماضی کی باقیات

Persian

ग़ुबार-ए-वक़्त में अब किस को खो रही हूँ मैं ये बारिशों का है मौसम कि रो रही हूँ मैं — Shahnaz Parveen Sahar

यह वाक्यांश समय को एक विशाल, अनंत रेगिस्तान के रूप में दर्शाता है जहाँ क्षण और यादें धूल की तरह बस जाती हैं। कविता में, यह जीवन की क्षणभंगुरता और समय के अनिवार्य प्रवाह को पकड़ता है, जो केवल अतीत के निशान छोड़ता है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग नॉस्टेल्जिया या खोए हुए क्षणों की उदासी व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह इतिहास के भार या वर्तमान में बनी रहने वाली यादों के बोझ का प्रतीक भी हो सकता है।

समय की धूल में, कवि अतीत की गूंज के लिए एक कैनवास पाते हैं। यह जीवन की क्षणभंगुरता की याद दिलाता है।