Meaning of

गौ़र

gaur • غور

ध्यान; विचार; मनन

attention; contemplation; consideration

توجہ; غور و فکر; ملاحظہ

Arabic

मेरी बातों पे आप थोड़ा भी
ग़ौर करते तो बात बन जाती

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सारे का सारा तो मेरा भी नहीं
और वो शख़्स बे-वफ़ा भी नहीं

ग़ौर से देखने पे बोली है
शादी से पहले सोचना भी नहीं

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हाल ये है कि अपनी हालत पर
ग़ौर करने से बच रहा हूँ मैं

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क्या सितम है कि अब तिरी सूरत
ग़ौर करने पे याद आती है

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उस की आँखों को कभी ग़ौर से देखा है ‘फ़राज़'
रोने वालों की तरह जागने वालों जैसी

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कल रात बहुत ग़ौर किया है सो हम उस की
तय कर के उठे हैं कि तमन्ना ना करेंगे

इस बार वो तल्ख़ी है की रूठे भी नहीं हम
अब के वो लड़ाई है के झगड़ा ना करेंगे

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अब तो बीमार-ए-मोहब्बत तेरे
क़ाबिल-ए-ग़ौर हुए जाते हैं

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मैं ने तो यूँँही राख में फेरी थीं उँगलियाँ
देखा जो ग़ौर से तिरी तस्वीर बन गई

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माँ के क़दमों के निशाँ हैं कि दिए रौशन हैं
ग़ौर से देख यहीं पर कहीं जन्नत होगी

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किसी ने मुझ से कह दिया था ज़िंदगी पे ग़ौर कर
मैं शाख़ पर खिला हुआ गुलाब देखता रहा

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मेरी बातों पे आप थोड़ा भी
ग़ौर करते तो बात बन जाती

27

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सारे का सारा तो मेरा भी नहीं
और वो शख़्स बे-वफ़ा भी नहीं

ग़ौर से देखने पे बोली है
शादी से पहले सोचना भी नहीं

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'गौ़र' का मूल भाव एक ठहराव का आह्वान है, जहाँ मन किसी विचार या अवलोकन में गहराई से संलग्न होता है। कविता में, यह शब्द हृदय के मौन संवादों को समेटता है, जहाँ हर ठहराव अर्थ से भरा होता है और हर विचार अपने आप में एक ब्रह्मांड होता है।

कवि अक्सर 'गौ़र' का उपयोग आत्मनिरीक्षण की भावना को जगाने के लिए करते हैं। यह किसी रहस्योद्घाटन से पहले के शांत क्षणों या गहन अनुभव के बाद के विचार को दर्शा सकता है।

'गौ़र' एक कोमल आह्वान है ठहरने और विचार करने का, मौन के भीतर की गहराई की याद दिलाता है।