Meaning of

चर्ख़

charkh • چرخ

पहिया; आकाश; भाग्य

wheel; sky; fate

پہیہ; آسمان; قسمت

Persian

पतंग ऐसे नहीं उड़ती इसे वैसे उड़ाओ तुम वही कहता है ये अक्सर जो बस चरखी पकड़ता है — Tanoj Dadhich
कोई चर्ख़ाब सा लगे है इश्क़ ज़द में इस के जो आया डूब गया — A R Sahil "Aleeg"
चर्ख़ मेरी प्यास से वाक़िफ़ हुआ धूप ने सहरा पे दरिया लिख दिया — pankaj pundir
ब-चश्म-ए-अश्कबार है जबीं ज़मीन पर मगर ये अश्क जा रहे हैं चर्ख़ की तरफ़ — Abdulla Asif
राह तकते हुए आँखों का बुरा हाल हुआ दिल लगाने के लिए अब कोई चर्ख़ा ढूँढ़े — Harsh Kumar Bhatnagar

मूल रूप से 'चर्ख़' का अर्थ पहिया है, जो गति और चक्रों का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर आकाश या स्वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, जो भाग्य और समय की अनंत प्रकृति को दर्शाता है। यह शब्द जीवन के शाश्वत चक्र की भावना को जागृत करता है, जहाँ भाग्य पहिये की तरह घूमता है, कभी अनुकूल, कभी चुनौतीपूर्ण।

'चर्ख़' का उपयोग कवि अक्सर भाग्य की अनिश्चितता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह मानव प्रयासों पर नजर रखने वाले आकाश या समय के निरंतर प्रवाह का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द सांसारिक संघर्षों के विपरीत, अस्तित्व के ब्रह्मांडीय पैमाने को उजागर करता है।

'चर्ख़' की विशालता में, कवि मानव स्थिति का एक दर्पण पाते हैं - सदैव घूमता, सदैव बदलता।