Meaning of

चश्म-ए-बसीरत

chashm-e-baseerat • چشم بصیرت

सूझबूझ भरी दृष्टि; बुद्धिमत्ता

insightful vision; wisdom

بصیرت بھری نظر; حکمت

Arabic

है बाइस-ए-कुल्फ़त यूँँ कमाल अपना दिखाना बे चश्म-ए-बसीरत है तमाशाई हमारा — Abdulla Asif

चश्म-ए-बसीरत एक ऐसी दृष्टि को संदर्भित करता है जो सतह से परे देखती है, सत्य और बुद्धिमत्ता के सार को पकड़ती है। मूल रूप में, यह एक सूझबूझ और विवेकपूर्ण दृष्टि को दर्शाता है। कविता ने इस शब्द को अपनाया है ताकि वह गहरी समझ और स्पष्टता का प्रतीक बन सके जो सामान्य धारणा से परे जाती है।

कवि 'चश्म-ए-बसीरत' का उपयोग गहरी समझ की भावना को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर सतही दृष्टि के विपरीत होता है, जिससे धारणा की गहराई को उजागर किया जाता है। यह शब्द बुद्धिमत्ता और सत्य की खोज करने वाले छंदों में प्रिय है।

चश्म-ए-बसीरत हमें स्पष्ट के परे देखने के लिए आमंत्रित करता है, दुनिया के साथ गहरे जुड़ाव का आग्रह करता है। यह बुद्धिमत्ता और स्पष्टता का आह्वान है।