Meaning of

जनाज़ा

janaaza • جنازہ

अंतिम यात्रा; अर्थी; ताबूत

funeral procession; bier; coffin

جنازہ; تابوت; میت

Arabic

बेवजह ये ज़िंदगी ऐसा तमाशा कर रही है
हम न जी सकते न ये 'काफ़िर' जनाज़ा कर रही है

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किसी से छोटी सी एक उम्मीद बाँध लीजिए
मोहब्बतों का अगर जनाज़ा निकालना है

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कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यूँ नहीं जाते

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तेरे दर से जब उठ के जाना पड़ेगा
ख़ुद अपना जनाज़ा उठाना पड़ेगा

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मेरा जनाज़ा रोज़ उठता है, कि अब
शमशान में दो नौकरी कोई मुझे

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मैं अब मर चुका हूँ, मुबारक हो सब को
ज़नाजा मेरा अब उठाओ तो कोई

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कोई तो मिरे मकाँ में सर-ए-तन्हा का हो साथी
कोई ये ख़बर उड़ा दे कि जनाज़ा उठ रहा है

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ख़्वाहिशों का जनाज़ा उठा रक्खा है
तेरा ग़म अब भी दिल से लगा रक्खा है

ख़ुद से भी ख़ुद को ठुकराया है प्यार में
ख़ुद को भी ख़ुद का दुश्मन बना रक्खा है

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फ़र्क़ इतना सा पड़ा है आप के जाने से मुझ को
हर जनाज़ा जो दिखे वो सोच कर लगता है अपना

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फिर से अरमान कोई क़त्ल हुआ है मेरा
अश्क आए हैं मेरे ग़ुस्ल-ए-जनाज़ा करने

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बेवजह ये ज़िंदगी ऐसा तमाशा कर रही है
हम न जी सकते न ये 'काफ़िर' जनाज़ा कर रही है

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किसी से छोटी सी एक उम्मीद बाँध लीजिए
मोहब्बतों का अगर जनाज़ा निकालना है

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'जनाज़ा' शब्द अंतिम यात्रा की गंभीर और शोकपूर्ण भावना को दर्शाता है। कविता में, यह जीवन की अंतिमता, विदाई की शांत गरिमा, और समुदाय के सामूहिक शोक का प्रतीक होता है। यह छवि हानि के बोझ और मृत्यु की अनिवार्यता से भरी होती है।

कवि अक्सर 'जनाज़ा' का उपयोग मृत्यु और जीवन की क्षणभंगुरता के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह समय की मौन यात्रा, वह अनिवार्य यात्रा जिसे हम सभी को करना है, और शोक के साझा मानव अनुभव को दर्शा सकता है।

'जनाज़ा' अपनी शांत गरिमा में, जीवन और मृत्यु की साझा यात्रा की याद दिलाता है। यह हमारी सामूहिक मानवता का एक मार्मिक प्रतीक है।