हमारा इक सहारा था
उसी से बस गुज़ारा था
ये जो आँखें हैं ना तेरी
यहाँ इक घर हमारा था
कभी शा
में सुहानी थी
कभी सूरज इशारा था
तू जब तक साथ था मेरे
हाँ हर ग़म मुझ सेे हारा था
तेरे ख़ातिर जहाँ डूबा
वो दरिया भी किनारा था
नज़र में हुस्न लाखों थे
हमें पर वो ही प्यारा था
कहीं भी दिल न लग पाया
तेरा जाना ख़सारा था
उसी ने फिर उजाड़ा यार
जिसे हमने सँवारा था
अलग ही नूर था इस
में
मेरा चेहरा सितारा था
कहानी तक लिखी तुझपर
ग़ज़ल तक में उतारा था
वो शायर मर गया इक दिन
अली जिसका सहारा था
Read Full