
तेरे दिल की इक ये बस्ती पहले उस इक राजा की थी
जिस ने तेरे नाम पर जंगें भी बे-अंदाज़ा की थी
क्या हुआ जो आपने रातों की नींदें मार डाली
हम ने भी राहत व नुसरत सुनके यादें ताज़ा की थी
— "Nadeem khan' Kaavish"
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