Meaning of

जहान-ए-ख़राब

jahaan-e-kharaab • جہان خراب

बर्बाद दुनिया; अराजकता में दुनिया

ruined world; world in chaos

برباد دنیا; افراتفری میں دنیا

Persian

इस जहान-ए-ख़राब में सोहिल और क्या क्या मिले नहीं मालूम — Sohil Barelvi
कोई नहीं बचेगा जहान-ए-ख़राब में सब को सजा मिलेगी याँ अपने गुनाह की — Sohil Barelvi
सद-शुक्र वक़्त पर जो मुझे दोस्त तुम मिले वर्ना मैं जा चुका था जहान-ए-ख़राब में — Sohil Barelvi

जहान-ए-ख़राब वीरानी और अव्यवस्था की भावना को उभारता है। कविता में, यह अक्सर मानव अस्तित्व की अराजकता और नैतिक मूल्यों के पतन का प्रतीक होता है। यह चित्रण स्पष्ट है, एक ऐसी दुनिया को दर्शाता है जो अपनी राह खो चुकी है।

कवि जहान-ए-ख़राब का उपयोग अस्तित्वगत निराशा और सामाजिक पतन के विषयों की खोज के लिए करते हैं। इसे अक्सर मासूमियत के नुकसान और आदर्शों के भ्रष्टाचार की आलोचना करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह वाक्यांश व्यक्तिगत आत्मनिरीक्षण और अर्थ की खोज के लिए पृष्ठभूमि के रूप में भी काम कर सकता है।

जहान-ए-ख़राब हमें अराजकता के बीच आशा खोजने, बर्बादी से पुनर्निर्माण करने की चुनौती देता है।