Meaning of

जाम-ए-पज़ीराई

jaam-e-paziraai • جام پذیرائی

अतिथि-सत्कार का प्याला; स्वागत का पात्र

cup of hospitality; vessel of welcome

مہمان نوازی کا جام; استقبال کا پیالہ

Persian

मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis

अपने मूल अर्थ में, जाम-ए-पज़ीराई मेहमानों का स्वागत करने की गर्मजोशी और उदारता को दर्शाता है। कविता में, यह खुले दिल और किसी को मूल्यवान महसूस कराने की कला का प्रतीक है।

कवि अक्सर जाम-ए-पज़ीराई का उपयोग आतिथ्य और गर्मजोशी के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह किसी ऐसे व्यक्ति का स्वागत करने की मिठास और कड़वाहट को भी दर्शा सकता है जो शायद न रुके।

जाम-ए-पज़ीराई स्वागत की सुंदरता और मानवीय संबंधों की क्षणभंगुरता की कोमल याद दिलाता है।