Meaning of

जु़र्म

jurm • جرم

अपराध; गलती; पाप

crime; offense; sin

جرم; خطا; گناہ

Arabic

हम ने क़ुबूल कर लिया अपना हर एक जुर्म अब आप भी तो अपनी अना छोड़ दीजिए — Harsh saxena
ख़ुद-कुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है इस लिए इश्क़ में मर मर के जिया जाता है — Ibrat Siddiqui
मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँँ नहीं देते — Ahmad Faraz
जुर्म में हम कमी करें भी तो क्यूँँ तुम सज़ा भी तो कम नहीं करते — Jaun Elia
फ़रेब दे गया इस सादगी से वो मुझ को कि जुर्म सारा ही मजबूरियों के सर आया — Harsh saxena
ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं और क्या जुर्म है पता ही नहीं — Krishna Bihari Noor

'जुर्म' अपने मूल में नैतिक या कानूनी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले कृत्य को संदर्भित करता है। कविता में, यह अक्सर गलत कार्यों से जुड़े आंतरिक संघर्ष और अपराधबोध में गहराई से उतरता है, मानव स्थिति और मुक्ति के संघर्ष पर विचार करता है।

कवि 'जुर्म' का उपयोग अपराधबोध और मुक्ति के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अंतरात्मा के भार और क्षमा की खोज का प्रतीक हो सकता है। अक्सर मासूमियत के साथ विपरीत, यह मानव प्रकृति की द्वैतता को उजागर करता है।

'जुर्म' आत्मा की छायाओं का दर्पण है, हमारी त्रुटियों और मुक्ति की अनंत आशा की याद दिलाता है। यह अंतरात्मा की मौन गूंज है।