Meaning of

तड़पे

tadpe • تڑپے

तड़पना; तृष्णा

to writhe; to yearn

تڑپنا; تڑپ

Sanskrit

कान्हा भी तड़पे थे राधा की ख़ातिर
हम भी जानाँ तेरे ख़ातिर तड़पे हैं

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ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल
न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल

सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो
अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल

ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब
समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल

कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा
सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल

मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा
जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल

हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं
कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल

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चाँद तारों को तकना तो कुछ भी नहीं
रात को ऐसे जगना तो कुछ भी नहीं

तड़पे थे राम भी जानकी के लिए
फिर हमारा तड़पना तो कुछ भी नहीं

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कान्हा भी तड़पे थे राधा की ख़ातिर
हम भी जानाँ तेरे ख़ातिर तड़पे हैं

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ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल
न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल

सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो
अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल

ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब
समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल

कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा
सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल

मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा
जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल

हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं
कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल

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तड़पे शब्द गहरी तृष्णा और बेचैनी का भाव जगाता है। मूल रूप में यह शारीरिक या भावनात्मक तड़प का वर्णन करता है, एक ऐसी स्थिति जिसमें शांति नहीं मिलती। कविता में इस शब्द को अपनाया गया है ताकि मानव हृदय में उठने वाली गहरी और अक्सर अधूरी तृष्णा और चाहत को व्यक्त किया जा सके।

कवि अक्सर 'तड़पे' का उपयोग अप्राप्त प्रेम की तीव्रता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेमी के हृदय की उथल-पुथल को चित्रित करता है। यह शब्द शांति के विपरीत है, आंतरिक अराजकता को उजागर करता है।

कविता में, 'तड़पे' आत्मा की अव्यक्त पीड़ा का माध्यम बन जाता है। यह उस तृष्णा के सार को पकड़ता है जो शब्दों से परे है।