Meaning of

तारीख़

taarikh • تاریخ

इतिहास; तिथि

history; date

تاریخ; تاریخ

Arabic

तारीख़ आ गई है उधर कार्ड छप गए अब कब कहेगी तुझ को वो लड़का नहीं पसंद — Kushal Dauneria
ये जब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने लम्हों ने ख़ता की थी सदियों ने सज़ा पाई — Muzaffar Razmi
चाहे जितना तारीख़ तूल कर लेना लेकिन जानी हम को क़ुबूल कर लेना — Arohi Tripathi
मैं पहाड़ हूँ एक जगह पे रुका हुआ वो कैलेंडर है, तारीख बदलती रहती है — Om Shukla
रोज़ तारीख़ कैलेंडर में बदल जाती थी फिर वो तारीख़ भी आई कि कैलेंडर बदला — Shakir Dehlvi
कोर्ट में तारीख़ के ये सिलसिले चलते रहे और वो लड़की वहाँँ पर शर्म से ही मर गई — Sunny Seher
नवंबर दो, दिया था हिज्र का तोहफ़ा उसी तारीख़ को मातम मनाता हूँ — Kuldeep Tripathi KD
कल बदल दूँगा घर का कैलेंडर मैं भी ज़ेहन में पर कुछ तारीख़ें रह जाएगी — SIDDHARTH SHARMA
आ ही गया मैं देख तेरे शहर अब तारीख़ अब मिलने की कैसे टलती है — Lalit Mohan Joshi

मूल रूप से, 'तारीख़' घटनाओं के कालानुक्रमिक रिकॉर्ड को संदर्भित करता है। कविता में, यह मात्र तिथियों से परे जाकर मानव अनुभव का एक ताना-बाना बन जाता है, जहाँ व्यक्तिगत और सामूहिक स्मृतियाँ आपस में जुड़कर अस्तित्व की एक समृद्ध कथा बनाती हैं।

कवि 'तारीख़' का उपयोग समय और स्मृति की परतों में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह अतीत की सभ्यताओं की भव्यता, व्यक्तिगत मील के पत्थरों की अंतरंगता, या समय की अपरिहार्य प्रगति को जागृत कर सकता है।

कविता में, 'तारीख़' अतीत और वर्तमान के बीच एक पुल बन जाता है, कहानियों को बुनता है जो हमारी साझा मानवता को परिभाषित करती हैं।