इस तरह ज़िंदगानी को गुलज़ार कीजिएसब रंजिशे भुलाइए और प्यार कीजिएपैग़ाम दे रही है ये तारीख़-ए-करबलासोए हुए ज़मीर को बेदार कीजिए— Shajar Abbas