Meaning of

तिशना

tishna • تشنا

प्यासा; लालायित

thirsty; longing

پیاسا; مشتاق

Persian

लबों पर तिश्नगी चाहत की जावेदानी होने तक
रहा ठहरा, अना सागर कि पानी पानी होने तक

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तुम सब समझ चुके हो नहीं राज़ ये कोई
क्यूँ देखने लगे हैं तुम्हें तिश्नगी से हम

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अलग बैठे थे फिर भी आँख साक़ी की पड़ी हम पर
अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आएँगे

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प्यास जहाँ की एक बयाबाँ तेरी सख़ावत शबनम है
पी के उठा जो बज़्म से तेरी और भी तिश्ना-काम उठा

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सियाने आदमी हो, इश्क़ के चक्कर में मत पड़ना
तुम्हें बर्बाद कर देगा, तुम्हें अच्छा बना देगा

ख़ुदा चालाक है वो तिश्नगी तो क्या बुझाएगा
बना देगा समुंदर, और उसे खारा बना देगा

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तड़प रही है मुहब्बत की तिश्नगी मेरी
यहाँ कोई नहीं सुनता है शा'इरी मेरी

ख़ुशी नहीं है मुक़द्दर में दोस्तों शायद
किसी के ग़म में गुजरती है ज़िंदगी मेरी

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अभी तो और बढ़ेगी ये तिश्नगी दिल की
अभी तो और भी ज़्यादा वो याद आएँगे

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तिश्नगी अफ़सुर्दगी गुम-गश्तगी बेचारगी
हासिल-ए-सहरा-नवर्दी हम ने पाया भी तो क्या

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कैसे बचता शिकस्तगी से बदन
जलता रहता है तिश्नगी से बदन

अब भी सहमा हुआ है कमरे में
शब-ए-रफ़्ता की तीरगी से बदन

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गला ही घोंट देता है वो अपनी तिश्नगी का
मैं उस को ज़हर लगता हूँ सो पीता ही नहीं है

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लबों पर तिश्नगी चाहत की जावेदानी होने तक
रहा ठहरा, अना सागर कि पानी पानी होने तक

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तुम सब समझ चुके हो नहीं राज़ ये कोई
क्यूँ देखने लगे हैं तुम्हें तिश्नगी से हम

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'तिशना' शब्द एक अधूरी प्यास का सार प्रस्तुत करता है, जो शाब्दिक और रूपक दोनों है। कविता में, यह अक्सर एक अतृप्त इच्छा या लालसा का प्रतीक होता है, एक ऐसी खोज जो पहुंच से परे हो, चाहे वह प्रेम हो, ज्ञान हो, या आध्यात्मिक पूर्ति।

कवि 'तिशना' का उपयोग इच्छाओं की निरंतर खोज को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर पूर्ति के विपरीत होता है, जो निरंतर लालसा की मानव स्थिति को उजागर करता है।

कविता में 'तिशना' उस अंतहीन मानव खोज की याद दिलाता है जो बस पहुंच से परे है।