Meaning of

धज

dhaj • دھج

दिखावट; शैली; भव्यता

appearance; style; grandeur

دکھاوا; طرز; شان

Sanskrit

बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ — Rahat Indori
साँवले तन पे ग़ज़ब धज है बसंती शाल की जी में है कह बैठिए अब जय कनहय्या लाल की — Insha Allah Khan
रात भर तुम तो सुकूँ की नींद में सोते रहे पर सुकूँ की धज्जियाँ मैं ने उड़ाईं रात भर — Ravi 'VEER'
कभी कभी मिलें अगर मिलें तो यूँँ गले मिलें न राख हो न हो धुआँ निशान अधजले मिलें — Umesh Maurya
ज़्यादा सज धज के नहीं निकला करो मैं नहीं चाहता सब देखें तुम्हें — Nirbhay Nishchhal
ज़रा सा चूक गया मैं तुझे समझने में वगरना ज़ीस्त तिरी धज्जियाँ उड़ाता मैं — Mohit Subran

मूल रूप में 'धज' का अर्थ किसी व्यक्ति या वस्तु की बाहरी दिखावट या शैली से है। यह गरिमा और भव्यता की भावना को व्यक्त करता है, जो अक्सर इस बात से जुड़ा होता है कि कोई खुद को दुनिया के सामने कैसे प्रस्तुत करता है। कविता में, इस शब्द का विस्तार कर इसे शान और मौन शक्ति की छवि के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

'धज' का उपयोग कवि अक्सर किसी चरित्र या दृश्य की मौन शान का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह अराजकता के बीच खड़े एक शाही व्यक्ति की छवि या प्रकृति की शांत गरिमा को उजागर कर सकता है। यह शब्द शक्ति के अधिक स्पष्ट प्रदर्शनों के विपरीत है, और इसके बजाय सूक्ष्मता और अनुग्रह पर ध्यान केंद्रित करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'धज' उपस्थिति की मौन शक्ति को समेटे हुए है। यह हमें याद दिलाता है कि सच्ची भव्यता अक्सर सूक्ष्मता में निहित होती है।