Meaning of

नक़ाब-ए-ज़र्द

naqaab-e-zard • نقاب زرد

पीला घूँघट; पतझड़ का प्रतीक; पतन

yellow veil; metaphor for autumn; decline

زرد نقاب; خزاں کی علامت; زوال

Persian

मुँह पर नक़ाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ़ पर गुलाल होली की शाम ही तो सहर है बसंत की — Lala Madhav Ram Jauhar

'नक़ाब-ए-ज़र्द' पीले घूँघट की छवि उत्पन्न करता है, जो ऋतुओं के सूक्ष्म और उदासीन परिवर्तन का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर पतझड़ के आगमन का प्रतिनिधित्व करता है, जो प्रकृति की जीवंतता के कोमल पतन और शांत चिंतन का समय होता है।

'नक़ाब-ए-ज़र्द' का उपयोग कवि परिवर्तन और अस्थिरता के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे अक्सर वसंत की जीवंतता के विपरीत रखा जाता है। यह शब्द व्यक्तिगत पतन या संबंधों के मुरझाने को भी दर्शा सकता है।

अपनी शांत उदासी में, 'नक़ाब-ए-ज़र्द' जीवन के अनिवार्य परिवर्तनों का सार पकड़ता है।