Meaning of

निगाह-ए-ख़ार

nigaah-e-khaar • نگاہ خار

काँटेदार नज़र; चुभती हुई दृष्टि

thorny glance; piercing look

نگاہ خار; چبھتی ہوئی نظر

Persian

निगाह-ए-ख़ार में हम ख़ार बनके चुभने लगे गुल-ए-चमन पे लिखी जब से शा'इरी हमनें — Shajar Abbas

'निगाह-ए-ख़ार' एक ऐसी नज़र की तीव्रता और तीक्ष्णता को दर्शाता है जो दिल को भेद सकती है। यह आकर्षण और खतरे की भावना को समेटे हुए है, जो उस सुंदरता की दोहरी प्रकृति को पकड़ता है जो एक साथ मोहित और घायल कर सकती है। कविता में, यह अक्सर प्रेम और पीड़ा के जटिल अंतर्संबंध का प्रतीक है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग तीव्र भावनाओं के आकर्षण और खतरे को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह उन छंदों में प्रकट होता है जो प्रेम की खट्टे-मीठे स्वभाव की खोज करते हैं, जहाँ सुंदरता और पीड़ा अविभाज्य हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'निगाह-ए-ख़ार' प्रेम की द्वैतता का सार पकड़ता है - इसकी चंगा करने और चोट पहुँचाने की शक्ति।