Meaning of

परवाज़

parvaaz • پرواز

उड़ान; आरोहण

flight; ascent

پرواز; عروج

Persian

इस तरह मजबूरियों में दूर हैं अपने वतन से
जिस तरह परवाज़ करती है यहाँ ये रूह तन से

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इतना ऊँचा उड़ना भी कुछ ठीक नहीं
पाबंदी लग जाती है परवाज़ों पर

तुझ को छू कर और किसी की चाह रखे
हैरत है और लानत है ऐसे हाथों पर

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तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा
तेरे सामने आसमाँ और भी हैं

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तू शाही है परवाज़ है काम तेरा
तिरे सामने आ
समाँ और भी हैं

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अंजाम उस के हाथ है आग़ाज़ कर के देख
भीगे हुए परों से ही परवाज़ कर के देख

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दिल से जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है

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ऐ ताइर-ए-लाहूती उस रिज़्क़ से मौत अच्छी
जिस रिज़्क़ से आती हो परवाज़ में कोताही

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परिंद पेड़ से परवाज़ करते जाते हैं
कि बस्तियों का मुक़द्दर बदलता जाता है

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जब बुलंदी का गुमाँ था तो नहीं याद आई
अपनी परवाज़ से टूटे तो ज़मीं याद आई

वही आँखें कि जो ईमान-शिकन आँखें हैं
उन्हीं आँखों की हमें दावत-ए-दीं याद आई

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कौन से दिल से मैं परवाज़ की उम्मीद करूँँ
क़ैद कर के मुझे सय्याद ने पर काट दिए

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इस तरह मजबूरियों में दूर हैं अपने वतन से
जिस तरह परवाज़ करती है यहाँ ये रूह तन से

1

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इतना ऊँचा उड़ना भी कुछ ठीक नहीं
पाबंदी लग जाती है परवाज़ों पर

तुझ को छू कर और किसी की चाह रखे
हैरत है और लानत है ऐसे हाथों पर

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'परवाज़' शब्द उठने और हवा में चलने के सार को पकड़ता है। कविता में, यह आत्मा की मुक्ति की यात्रा और सपनों की खोज का प्रतीक है।

कवि 'परवाज़' का उपयोग स्वतंत्रता, महत्वाकांक्षा, और पारगमन के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर सांसारिक अस्तित्व की सीमाओं के विपरीत होता है।

कविता के क्षेत्र में, 'परवाज़' असीमित आत्मा और ऊँचाई की अनंत खोज का प्रमाण है।