Meaning of

पशेमाँ

pashemaan • پشیمان

पछतावा; खेद; प्रायश्चित

regret; remorse; repentance

پچھتاوا; ندامت; توبہ

Persian

क्यूँँ पशेमाँ हो अगर वअ'दा वफ़ा हो न सका कहीं वादे भी निभाने के लिए होते हैं — Ibrat Machlishahri
अपने किए पे तुम हो पशेमान किस लिए इनकार कर रही हो मेरी जान किस लिए — Arohi Tripathi
शहद हो तुम मिरी ज़बाँ ख़ंजर तुम सेे मिल कर बहुत पशेमाँ हूँ — Ajeetendra Aazi Tamaam
करती नहीं ज़लील कभी मौत भी यहाँ क्यूँ कर रही मुझे तू पशेमान ज़िन्दगी — Neeraj Yadav 'Neer'
की मेरे क़त्ल के बा'द उस ने जफ़ा से तौबा हाए उस ज़ूद-पशीमाँ का पशीमाँ होना — Mirza Ghalib
हुस्न होता क्यूँँ पशेमाँ ही यहाँ महज़ बिखरे जब तेरे अंदाज़ हैं — Manohar Shimpi
क्यूँ पशेमाँ हो मुझे वो देख कर देख उस को फ़ासिले से ख़ुश हूँ मैं — Chetan
शब-ए-ज़ुल्मत भी हो जाए पशेमाँ दिया ऐसा जलाना चाहता हूँ — Waseem Siddharthnagari

पशेमाँ एक ऐसे दिल की भावना को पकड़ता है जो पिछले कार्यों से बोझिल है, एक आत्मा जो मोक्ष की तलाश में है। कविता में, यह आंतरिक उथल-पुथल के परिदृश्य को चित्रित करता है, जहाँ पिछले गलतियों की गूँज बनी रहती है, और क्षमा की चाह एक मार्मिक विषय बन जाती है।

कवि 'पशेमाँ' का उपयोग अपराधबोध और मोक्ष के विषयों में गहराई से उतरने के लिए करते हैं। यह अक्सर खोए हुए प्रेम या चूके हुए अवसरों की कथाओं के साथ होता है, जहाँ पछतावे का भार भावनात्मक यात्रा को आकार देता है।

पशेमाँ दिल की मौन फुसफुसाहट है, अतीत की छायाओं की याद दिलाता है। यह उपचार और समझ की ओर एक यात्रा है।