Meaning of

पशेमाँ

pashemaan • پشیمان

पछतावा; खेद; प्रायश्चित

regret; remorse; repentance

پچھتاوا; ندامت; توبہ

Persian

शब-ए-ज़ुल्मत भी हो जाए पशेमाँ
दिया ऐसा जलाना चाहता हूँ

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क्यूँँ पशेमाँ हो अगर वअ'दा वफ़ा हो न सका
कहीं वादे भी निभाने के लिए होते हैं

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की मेरे क़त्ल के बा'द उस ने जफ़ा से तौबा
हाए उस ज़ूद-पशीमाँ का पशीमाँ होना

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अपने किए पे तुम हो पशेमान किस लिए
इनकार कर रही हो मेरी जान किस लिए

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कोई इक भी जब न मेहमाँ पाया हम ने
फिर तो अपना घर ही वीराँ पाया हम ने

यूँँ लगा जैसे बिछड़ के ख़ुश बहुत हैं
देखा तो ख़ुद को पशेमाँ पाया हम ने

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दिल-ए-मरहूम में अब जान नहीं आएगी
ज़िंदगी हो के पशेमान नहीं आएगी

देख कर जिस को मोहब्बत का तुम्हें धोका हुआ
अब कभी लब पे वो मुस्कान नहीं आएगी

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हुस्न होता क्यूँँ पशेमाँ ही यहाँ
महज़ बिखरे जब तेरे अंदाज़ हैं

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शहद हो तुम मिरी ज़बाँ ख़ंजर
तुम सेे मिल कर बहुत पशेमाँ हूँ

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क्यूँ पशेमाँ हो मुझे वो देख कर
देख उस को फ़ासिले से ख़ुश हूँ मैं

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करती नहीं ज़लील कभी मौत भी यहाँ
क्यूँ कर रही मुझे तू पशेमान ज़िन्दगी

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शब-ए-ज़ुल्मत भी हो जाए पशेमाँ
दिया ऐसा जलाना चाहता हूँ

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क्यूँँ पशेमाँ हो अगर वअ'दा वफ़ा हो न सका
कहीं वादे भी निभाने के लिए होते हैं

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पशेमाँ एक ऐसे दिल की भावना को पकड़ता है जो पिछले कार्यों से बोझिल है, एक आत्मा जो मोक्ष की तलाश में है। कविता में, यह आंतरिक उथल-पुथल के परिदृश्य को चित्रित करता है, जहाँ पिछले गलतियों की गूँज बनी रहती है, और क्षमा की चाह एक मार्मिक विषय बन जाती है।

कवि 'पशेमाँ' का उपयोग अपराधबोध और मोक्ष के विषयों में गहराई से उतरने के लिए करते हैं। यह अक्सर खोए हुए प्रेम या चूके हुए अवसरों की कथाओं के साथ होता है, जहाँ पछतावे का भार भावनात्मक यात्रा को आकार देता है।

पशेमाँ दिल की मौन फुसफुसाहट है, अतीत की छायाओं की याद दिलाता है। यह उपचार और समझ की ओर एक यात्रा है।