दिल-ए-मरहूम में अब जान नहीं आएगीज़िंदगी हो के पशेमान नहीं आएगीदेख कर जिस को मोहब्बत का तुम्हें धोका हुआअब कभी लब पे वो मुस्कान नहीं आएगी— Faiz Ahmad