Meaning of

पाज़ेब

paazeb • پازیب

पायल; पैर की आभूषण

anklet; foot ornament

پازیب; پاؤں کا زیور

Persian

ज़िन्दगी रुख़ पर जो तेरे छाई है ये ख़ामुशी
आ इसे मैं चीर दूँ पाज़ेब की झंकार से

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वो मेरी फिक्र तो करता है मगर प्यार नहीं
या'नी पाज़ेब में घुँघरू तो है झंकार नहीं

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रक़्स करना है तो फिर होश की पाज़ेब उतार
आलम-ए-वज्द में ही बे-ख़बरी आती है

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क्या वाक़ई वो तेरी पाज़ेब की खनक थी
ऐसा सुकून तो बस नुसरत के गाने में है

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सारे सुर उस की ख़ुशामद में लगे हैं देखिए तो
आज उस ने पैरों में पाज़ेब जो पहनी हुई है

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मैं ग़ज़ल का बदन सँवारता हूँ
जब तुम्हें पन्नों पर उतारता हूँ

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सोचता हूँ मैं अब तिरे बारे
कौन अब तुझ को सोचता होगा

किस को हासिल है तेरी तन्हाई
कौन ज़ुल्फ़ें सँवारता होगा

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पाज़ेब की आवाज़ ही अब गूॅंजती है कान में
होगी जहाँ भी तू कहीं लेकिन रहेगी ध्यान में

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वो मेरी पाज़ेब की झंकार से बीमार है
तो शिफ़ा ता-उम्र उस को अब मिलेगी ही नहीं

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नाच रहे सब सेे ये कह के फूल
वो इन के पाज़ेब बनाती है

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ज़िन्दगी रुख़ पर जो तेरे छाई है ये ख़ामुशी
आ इसे मैं चीर दूँ पाज़ेब की झंकार से

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वो मेरी फिक्र तो करता है मगर प्यार नहीं
या'नी पाज़ेब में घुँघरू तो है झंकार नहीं

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'पाज़ेब' शब्द कोमल पायल की छवि प्रस्तुत करता है जो हर कदम के साथ झंकार करती है, जो सौंदर्य और स्त्रीत्व का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर कोमल आकर्षण और गति की लयबद्ध सुंदरता को व्यक्त करता है।

कवि अक्सर 'पाज़ेब' का उपयोग प्रिय की उपस्थिति की सुंदरता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह कदमों की संगीतात्मकता और सूक्ष्मता के आकर्षण को पकड़ता है।

कविता में, 'पाज़ेब' पंक्तियों पर नृत्य करती है, सुंदरता और अनुग्रह की गूंज छोड़ती है।