Meaning of

प्रीत

preet • پریت

प्रेम; स्नेह; भक्ति

love; affection; devotion

محبت; پیار; عقیدت

Sanskrit

तुम मेरे वो लगते हो जो कोई नइँ हो गई मैं अमृता सी प्यार में — Neeraj Neer
मुहब्बत और भी ज़्यादा हसीं हो जाए, समझे "प्रीत" अगर नादानियाँ अपनी शरारत में बदल जाएँ — Prit
लहू दिल का निकाला और काग़ज में पिरोया है फ़कत इक शे'र लिखने, "प्रीत" पूरी रात रोया है — Prit
विपरीत क्यूँ न हो चले जीवन की धार भी ये संग तेरा नाव की पतवार सा लगे — Manish Yadav
तुम्हें ये सोच कर भी ख़ुश रहा करना है 'प्रीत' कोई है जो तुम्हें ख़ुश देख कर ख़ुश होता है — Prit
अधर पर बाँसुरी ले प्रीत का संसार रचती है कभी गिरिधर कभी मोहन बनाती उँगलियाँ देखो — Shubha Shukla Mishra Adhar
"प्रीत" ये इश्क़ की इक ही रीत जितना हारे, तेरी उतनी जीत — Prit
उसे मुझ सेे मोहब्बत है तभी तो हर दफ़ा वो 'प्रीत' परायों को मनाने के लिए मुझ को रुलाता है — Prit

प्रीत एक ऐसा शब्द है जो प्रेम की कोमल और गहरी भावना को समेटे हुए है। अपने मूल अर्थ में, यह गहरे स्नेह या भक्ति को दर्शाता है, जो अक्सर सांसारिकता से परे जाकर आध्यात्मिकता को छूता है। कविता ने इस शब्द को प्रेम के विभिन्न रंगों को खोजने के लिए अपनाया है, कोमल से लेकर प्रबल तक, सांसारिक से लेकर दिव्य तक।

कवि अक्सर 'प्रीत' का उपयोग प्रेम की पवित्रता और तीव्रता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेमियों के बीच के बंधन, किसी देवता के प्रति भक्ति, या प्रकृति के प्रति स्नेह का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द प्रेम के अधिक क्षणिक या सतही अभिव्यक्तियों के विपरीत गहराई और ईमानदारी पर जोर देता है।

प्रीत प्रेम की स्थायी और परिवर्तनकारी शक्ति का सार प्रस्तुत करता है। यह मानवीय संबंधों की गहराई पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है।