Meaning of

फ़ुर्सत-ए-ग़म

fursat-e-gham • فرصت غم

दुःख की फुर्सत; शोक से राहत

leisure of sorrow; respite from grief

غم کی فرصت; غم سے راحت

Persian

श्याम गोकुल न जाना कि राधा का जी अब न बंसी की तानों पे लहराएगा किस को फ़ुर्सत ग़म-ए-ज़िंदगी से यहाँ कौन बे-वक़्त के राग सुन पाएगा — Abid Hashri

'फ़ुर्सत-ए-ग़म' अपने मूल में उन दुर्लभ क्षणों की बात करता है जब दुःख ठहरता है, जिससे दिल को सांस लेने का अवसर मिलता है। कविता में, यह शब्द दुःख सहने और उसकी अस्थायी अनुपस्थिति में सांत्वना पाने के बीच के नाजुक संतुलन को दर्शाता है।

'फ़ुर्सत-ए-ग़म' का उपयोग कवि अक्सर आत्मनिरीक्षण और राहत की क्षणभंगुर प्रकृति की खोज के लिए करते हैं। यह निरंतर दुःख के विपरीत होता है, चिंतन के क्षणों को उजागर करता है। यह हृदय की पीड़ा की यात्रा में एक मधुर विराम का भी सुझाव दे सकता है।

दुःख और राहत के नृत्य में, 'फ़ुर्सत-ए-ग़म' दिल के शांत अंतराल को पकड़ता है। यह सभी भावनाओं की क्षणभंगुर प्रकृति की एक कोमल याद दिलाता है।