Meaning of

बेख़ुदी

bekhudi • بےخودی

विस्मृति; परमानंद; आत्म-विस्मरण

oblivion; ecstasy; self-forgetfulness

فراموشی; سرور; خود فراموشی

Persian

इश्क़ हसरत बेख़ुदी का ये क़सीदा पढ़ चला मसरूफ़ दिल आफ़त-रसीदा — Kaafir
दर्द, आँसू, बे-क़रारी, हिज्र, यादें, बेख़ुदी कौन कहता है मोहब्बत में मिला कुछ भी नहीं — Beybaar
गैर की महफ़िल में इतनी बेख़ुदी अच्छी नहीं लौटना हो घर को वापस तो मुसीबत मयकशी — anupam shah
तंग आ चुके हैं अपनी ही बेकली से फिर हम ठुकरा न दें कहीं ख़ुद को बेख़ुदी से फिर हम — Naresh sogarwal 'premi'

'बेख़ुदी' मूल रूप से विस्मृति या परमानंद में खो जाने की स्थिति को दर्शाता है। कविता में, यह उन गहन क्षणों को पकड़ता है जब कोई प्रेम या आध्यात्मिक अनुभवों में आत्मा से परे चला जाता है, जहां पहचान की सीमाएं धुंधली और विलीन हो जाती हैं।

कवि 'बेख़ुदी' का उपयोग प्रेम की प्रबल भावनाओं को व्यक्त करने के लिए करते हैं, जहां आत्मा प्रिय में खो जाती है। इसका उपयोग आध्यात्मिक परमानंद को वर्णित करने के लिए भी किया जाता है, जहां आत्मा सांसारिक सीमाओं से परे चली जाती है।

कविता के क्षेत्र में, 'बेख़ुदी' आत्मा से परे की यात्रा है, अनंत के साथ एक नृत्य जो आत्मा को आनंदमय समर्पण की स्थिति में छोड़ देता है।