Meaning of

बे-नक़ाब

be-naqaab • بےنقاب

अनावृत; प्रकट

unveiled; exposed

بے نقاب; ظاہر

Persian

तसव्वुर में भी अब वो बे-नक़ाब आते नहीं मुझ तक क़यामत आ चुकी है लोग कहते हैं शबाब आया — Hafeez Jalandhari
एक एक कर के पहले बे-नक़ाब कर दिया रौंद डाले फिर सभी नक़ाब ठोकरों तले — Mrkknathji
ख़ाक बस्तियों में घर रेत के बनाओगे रोज़ रोज़ ऐसे ही ख़ूब चोट खाओगे सोचते तो हैं हम भी छत से कूद जाएँ अब फिर ख़याल आता है तुम कहाँ पे जाओगे जो हमारे हो कर भी हर किसी को देखोगे बे-वफ़ा की गिनती में यार आ ही जाओगे बे-नक़ाब होकर के हम निकल तो आएँगे हो गया कहीं कुछ भी हमपे टिन-टिनाओगे शब के आठ बजते ही तुम कहाँ पे जाते हो कोई पूछ बैठा फिर बोलो क्या बताओगे जब रक़ीब बनकर ही कुछ नहीं हुआ तुम सेे तुम हबीब बनकर क्या बस्तियाँ जलाओगे जब नज़र झुकाओगे बात बन ही जाएगी प्यार से जो बोलेंगे तुम भी मान जाओगे इश्क़ का मुहब्बत का जब बुख़ार आएगा वक़्त पर दवा लेना ख़ुद ही भूल जाओगे जब कभी भी तन्हाई नोच कर के खाएगी मेरा नाम लिख कर तुम हाथ पर मिटाओगे दास्ताँ मोहब्बत की एक बार सुन लोगे मेरा नाम गीतों में तुम भी गुन-गुनाओगे — Prashant Kumar

'बे-नक़ाब' शब्द प्रकट करने या अनावरण करने की क्रिया को दर्शाता है। कविता में, यह सत्य, भावनाओं, या आत्मा या दुनिया के छिपे पहलुओं के अनावरण का प्रतीक है।

कवि अक्सर 'बे-नक़ाब' का उपयोग रहस्योद्घाटन और भेद्यता के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह उस क्षण को दर्शा सकता है जब छिपी हुई भावनाएँ प्रकाश में आती हैं या जब धोखे का मुखौटा हटा दिया जाता है।

अपने काव्यात्मक गहराई में, 'बे-नक़ाब' सत्य के प्रकट होने की साहस और सुंदरता को पकड़ता है।