Meaning of

रंग–ओ–बू

rang-o-boo • رنگ و بو

रंग और खुशबू; सुंदरता और आकर्षण

color and fragrance; beauty and allure

رنگ اور خوشبو; خوبصورتی اور دلکشی

Persian

कमी कमी सी थी कुछ रंग-ओ-बू-ए-गुलशन में लब-ए-बहार से निकली हुई दुआ तुम हो — Ali Sardar Jafri
मुझ से मिलना तो ऐसे मिलना तू मिले है गुल को जैसे रंग-ओ-बू — Chandan Sharma
घुल जाएँगे बाहों में रंग-ओ-बू की तरह 'अभय' गुलाब समझेंगे तोड़ेंगे फिर फेंक देंगे लोग — Abhay Pratap Singh
ये जिस्म तंग है सीने में भी लहू कम है दिल अब वो फूल है जिस में कि रंग-ओ-बू कम है — Pallav Mishra
मन्ज़र कोई नहीं है नहीं रंग-ओ-बू मगर शादाब मेरा नाम है अफ़सोस कीजिए — Shadab Shabbiri
चमन में इख़्तिलात-ए-रंग-ओ-बू से बात बनती है हम ही हम हैं तो क्या हम हैं तुम ही तुम हो तो क्या तुम हो — Sarshar Sailani

मूल रूप में, 'रंग-ओ-बू' रंग और खुशबू की इंद्रियों को समृद्धि का आभास देता है, जो अक्सर प्रकृति या प्रिय की सुंदरता का वर्णन करने के लिए उपयोग होता है। कविता ने इसे सुंदरता और प्रेम की क्षणभंगुर और मादक गुणों का प्रतीक बना दिया है।

'रंग-ओ-बू' का उपयोग कवि अक्सर वसंत की क्षणभंगुर सुंदरता या प्रिय की मोहक उपस्थिति को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एकांत की कठोरता या निराशा के एकरंगीपन के विपरीत है।

'रंग-ओ-बू' सुंदरता के क्षणभंगुर आकर्षण का सार पकड़ता है। यह जीवन के जीवंत लेकिन क्षणिक क्षणों की याद दिलाता है।