Meaning of

रंग-ए-हया

rang-e-haya • رنگ حیا

लज्जा का रंग; शर्म का गुलाबीपन

color of modesty; blush of shyness

حیا کا رنگ; شرم کی سرخی

Persian

रुख़्सार पर है रंग-ए-हया का फ़रोग़ आज बोसे का नाम मैं ने लिया वो निखर गए — Hakim Mohammad Ajmal Khan Shaida

यह वाक्यांश उस कोमल रंग की बात करता है जो लज्जा या शर्म के क्षणों में चेहरे पर आ जाता है। कविता में, यह रंग केवल शारीरिक लाली नहीं है, बल्कि आंतरिक पवित्रता और मासूमियत का प्रतीक है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग किसी पात्र की मासूमियत को दर्शाने के लिए करते हैं या किसी कमज़ोरी के क्षण को उजागर करने के लिए। यह साहस के विपरीत होता है और अक्सर प्रेम या लालसा की पृष्ठभूमि में रखा जाता है।

रंग-ए-हया मासूमियत के सबसे कोमल रूप को पकड़ता है। यह लज्जा में पाई जाने वाली सुंदरता की एक कोमल याद दिलाता है।