Meaning of

रस्म-ए-जहाँ

rasm-e-jahaan • رسم جہاں

दुनिया की रस्में; सांसारिक परंपराएँ

customs of the world; worldly traditions

دنیا کی رسمیں; دنیاوی روایات

Persian

'बाक़ी' जो चुप रहोगे तो उट्ठेंगी उँगलियाँ है बोलना भी रस्म-ए-जहाँ बोलते रहो — Baqi Siddiqui

यह वाक्यांश उन परंपराओं और रिवाजों की जटिल बुनावट को दर्शाता है जो मानव समाजों को परिभाषित करती हैं। कविता में, यह अक्सर सामाजिक मानदंडों के बोझ और समय के प्रवाह पर विचार करता है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग व्यक्तिगत इच्छाओं और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच के तनाव को खोजने के लिए करते हैं। यह अनुरूपता के खिलाफ संघर्ष या सांस्कृतिक विरासत की स्वीकृति का प्रतीक हो सकता है।

परंपरा और आधुनिकता के बीच के शाश्वत नृत्य पर एक चिंतन।