Meaning of

राज़

raaz • راز

गुप्त; रहस्य; पहेली

secret; mystery; enigma

راز; معمہ; بھید

Arabic

माँ मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं
सर पे आँचल नहीं होता है तो डर होता है

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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए
इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं

तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया
इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं

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अव्वल तो मैं नाराज़ नहीं होता हूँ लेकिन
हो जाऊँ तो फिर मुझ सेा बुरा होता नहीं है

101

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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या

77

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ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़
मुझ को आदत है मुस्कुराने की

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किसी बहाने से उस की नाराज़गी ख़त्म तो करनी थी
उस के पसंदीदा शाइ'र के शे'र उसे भिजवाए हैं

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उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन
दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में

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जो तेरी बाँहों में हँसती रही है खेली है
वो लड़की राज़ नहीं है कोई पहेली है

हाँ मेरा हाथ पकड़ कर झटक दिया उस ने
सहारा दे के बताया कि तू अकेली है

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मुझे कहता है झूठी हैं तेरी बेकार सी बातें फ़राज़
मगर लगता है वो मेरी उन्हीं बातों पे मरता है

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सभी से राज़ कह देता हूँ अपने
न जाने क्या छुपाना चाहता हूँ

53

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माँ मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं
सर पे आँचल नहीं होता है तो डर होता है

46

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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए
इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं

तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया
इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं

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'राज़' शब्द में रहस्य और छिपाव की भावना होती है। यह किसी छिपी हुई चीज़ को दर्शाता है, एक ऐसा सत्य जो आसानी से प्रकट नहीं होता। कविता में, 'राज़' अज्ञात की ओर एक द्वार है, पाठकों को उस गहराई का अन्वेषण करने के लिए आमंत्रित करता है जो तुरंत दिखाई नहीं देती, उन रहस्यों पर विचार करने के लिए जो सतह के नीचे छिपे होते हैं।

कवि अक्सर 'राज़' का उपयोग आश्चर्य और जिज्ञासा की भावना को जगाने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो एक साधारण कथा को छिपे अर्थों की जटिल बुनावट में बदल सकता है। 'राज़' और स्पष्टता के बीच का विरोधाभास अज्ञात के आकर्षण को उजागर करता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'राज़' हमें अदृश्य की सुंदरता को अपनाने के लिए आमंत्रित करता है। यह उन रहस्यों की फुसफुसाहट करता है जो हमारी दुनिया की समझ को समृद्ध करते हैं।