Meaning of

रुस्वा

rusva • رسوا

अपमानित; बेइज़्ज़त

disgraced; dishonored

رسوا; بے عزت

Arabic

इश्क़ हमारी बर्बादी को दिल से दुआएँ देता है
हम सेे पहले इतना रौशन नाम न था रुस्वाई का

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क्यूँ लिखूँ ज़ुल्फ़-ओ-लब-ओ-रुख़सार पे नग़्में बहुत
प्यार की पहली नज़र रुस्वाइयाँ ही क्यूँ लिखूँ

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यूँँ तो रुस्वाई ज़हर है लेकिन
इश्क़ में जान इसी से पड़ती है

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कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उस ने
बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की

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तुझ को सोचा तो पता हो गया रुसवाई को
मैं ने महफूज़ समझ रखा था तन्हाई को

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शिकस्ता दिल शब-ए-ग़म दर्द रुसवाई
अरे इतना तो चलता है मुहब्बत में

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अपनी रुस्वाई तिरे नाम का चर्चा देखूँ
इक ज़रा शे'र कहूँ और मैं क्या क्या देखूँ

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इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा
आदमी काम का नहीं होता

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इश्क़ के इज़हार में हर-चंद रुस्वाई तो है
पर करूँँ क्या अब तबीअत आप पर आई तो है

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शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा
इश्क़ तो रुस्वा हो ही चुका है हुस्न भी क्या रुस्वा होगा

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इश्क़ हमारी बर्बादी को दिल से दुआएँ देता है
हम सेे पहले इतना रौशन नाम न था रुस्वाई का

16

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क्यूँ लिखूँ ज़ुल्फ़-ओ-लब-ओ-रुख़सार पे नग़्में बहुत
प्यार की पहली नज़र रुस्वाइयाँ ही क्यूँ लिखूँ

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रुस्वा गहरे शर्म और सार्वजनिक अपमान की भावना को पकड़ता है। कविता में, यह अक्सर अनुग्रह से पतन की भावनात्मक उथल-पुथल को व्यक्त करता है, प्रतिष्ठा की नाजुकता को उजागर करता है।

रुस्वा का उपयोग उन पात्रों को चित्रित करने के लिए किया जाता है जिन्होंने सार्वजनिक अपमान सहा है। यह सहानुभूति और कभी-कभी दुखद अनिवार्यता की भावना को उभारता है। कवि खोई हुई प्रतिष्ठा और सामाजिक निर्णय के विषयों का अन्वेषण करते हैं।

रुस्वा हमें सम्मान और अपमान के बीच के नाजुक संतुलन की याद दिलाता है, जो मानव कथाओं में सदैव उपस्थित रहता है।