Meaning of

रुह

ruh • روح

आत्मा; रूह

soul; spirit

روح; جان

Arabic

जिस को ख़ुद मैं ने भी अपनी रूह का इरफ़ाँ समझा था वो तो शायद मेरे प्यासे होंटों की शैतानी थी — Jaun Elia
रूहों के पर्दा-पोश गुनाहों से बे-ख़बर जिस्मों की नेकियाँ ही गिनाता रहा हूँ मैं — Jaun Elia
अब तो गाँवो में भी ईंटों के महल बसने लगे गाँव की मिट्टी से वो ख़ुशबू रूहानी ख़ो गई — Divy Kamaldhwaj
जिस्म चादर सा बिछ गया होगा रूह सिलवट हटा रही होगी — Kumar Vishwas
सख़्त सर्दी में ठिठुरती है बहुत रूह मिरी जिस्म-ए-यार आ कि बेचारी को सहारा मिल जाए — Farhat Ehsaas
मुझ को बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर उस ने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर — Ankit Maurya
लोग औरत को फ़क़त जिस्म समझ लेते हैं रुह भी होती है उस में ये कहाँ सोचते हैं — Sahir Ludhianvi
दिल को सुकून रूह को आराम आ गया मौत आ गई कि दोस्त का पैग़ाम आ गया — Jigar Moradabadi
कभी उस को हम अपनी रूह का पैकर समझते थे बहुत नादान थे मक़्तल को अपना घर समझते थे — Haider Khan
मैं जानता हूँ तेरी रूह की तलब जानाँ तुझे बदन की तरफ़ से नहीं छुऊँगा मैं — Subhan Asad

रुह जीवन का सार है, वह अमूर्त आत्मा जो शरीर को जीवंत करती है। कविता में, यह अक्सर शाश्वत और दिव्य का प्रतिनिधित्व करती है, भौतिक क्षेत्र से परे अनंत से जुड़ाव।

कवि जीवन और मृत्यु, आध्यात्मिकता, और अर्थ की खोज के विषयों का अन्वेषण करने के लिए रुह का आह्वान करते हैं। यह आंतरिक आत्म या भीतर की दिव्य चिंगारी का प्रतीक हो सकता है।

रुह अस्तित्व के रहस्य को समेटे हुए है, नश्वर और शाश्वत के बीच एक काव्यात्मक पुल।