Meaning of

रेशा

resha • ریشہ

रेशा; धागा; तंतु

fiber; thread; strand

ریشہ; دھاگہ; تار

Persian

नज़र आए न तू जिन को परेशानी से मरते हैं जो तुझ को देख लेते हैं वो हैरानी से मरते हैं — Varun Anand
नींद उस की है दिमाग़ उस का है रातें उस की हैं तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू पर परेशाँ हो गईं — Mirza Ghalib
ये किस तरह का शोर है पिछले मकान में इस वक़्त आधी रात परेशान कौन है — nakul kumar
जब भी तिरी क़ुर्बत के कुछ इम्काँ नज़र आए हम ख़ुश हुए इतने कि परेशाँ नज़र आए — Sadique Naseem
आती है परेशानी तो आता है ख़ुदा याद वर्ना नहीं दुनिया में कोई तेरे सिवा याद — Farhat Abbas Shah
परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर के वफ़ा करने की नौबत आ गई है — Fahmi Badayuni
अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को मैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं — Aasi Uldani
चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है — Farhat Ehsaas
हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़ियादा चाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो चार गरेबाँ तुम से ज़ियादा — Majrooh Sultanpuri

'रेशा' का मूल अर्थ उन नाज़ुक धागों से है जो जीवन के ताने-बाने को बुनते हैं। कविता में, यह अक्सर उन जटिल संबंधों और नाज़ुक बंधनों का प्रतीक होता है जो जीवन को एक साथ बांधे रखते हैं।

'रेशा' का उपयोग कवि मानव संबंधों की नाज़ुकता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह भावनाओं के नाज़ुक संतुलन या प्रेम और हानि के बीच की महीन रेखा का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

कविता की दुनिया में, 'रेशा' हमें उन नाज़ुक धागों की याद दिलाता है जो हमारे जीवन को बांधते हैं, हमें उन्हें संजोने के लिए प्रेरित करते हैं।