Meaning of

रौनक़-ए-महफ़िल

raunaq-e-mehfil • رونق محفل

महफ़िल की शोभा; सभा का आकर्षण

splendor of the gathering; charm of the assembly

محفل کی رونق; اجتماع کا دلکشی

Persian

अब तो बस तन्हाइयाँ ही साथ रहती हैं सदा
याद पड़ता है कि पहले रौनक़-ए -महफ़िल थे हम

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हट के देखेंगे उसे रौनक़-ए-महफ़िल से कभी
सब्ज़ मौसम में तो हर पेड़ हरा लगता है

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हम वही हैं जो कभी रौनक़-ए-महफ़िल थे यहाँ
और अभी कोई हमें पूछने वाला भी नहीं

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ना चराग़-ए-बज़्म हूँ ना रौनक़-ए-मह़फ़िल हूँ मैं
जो दिल-ए-वीराँ से निकली वो सदा-ए-दिल हूँ मैं

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गुमाँ मत कर कि है तेरी बदौलत रौनक़े-महफ़िल
ग़ज़ल वालो यहाँ हम हैं तो ये बाज़ार चलता है

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अब तो बस तन्हाइयाँ ही साथ रहती हैं सदा
याद पड़ता है कि पहले रौनक़-ए -महफ़िल थे हम

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हट के देखेंगे उसे रौनक़-ए-महफ़िल से कभी
सब्ज़ मौसम में तो हर पेड़ हरा लगता है

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यह वाक्यांश एक सभा के भीतर की जीवंतता और आकर्षण का सार पकड़ता है। यह जीवंत बातचीत, हंसी, और एकता की भावना से भरे वातावरण का सुझाव देता है। कविता में, यह अक्सर हृदय की खुशी और समुदाय की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग एक जीवंत सभा और एक अकेले दिल के बीच के अंतर को उजागर करने के लिए करते हैं। यह खुशी की क्षणभंगुर प्रकृति का भी प्रतीक हो सकता है, क्योंकि महफ़िल की रौनक अक्सर अस्थायी होती है।

रौनक़-ए-महफ़िल क्षणभंगुर पलों का नृत्य है, प्रिय फिर भी क्षणिक।