Meaning of

शब-ए-वस्ल

shab-e-wasl • شب وصل

मिलन की रात; एकता की रात

night of union; night of togetherness

ملن کی رات; یکجہتی کی رات

Persian

इश्क़ जब आग है वस्ल दरिया रहे फिर शब-ए-वस्ल दिल से समुंदर लगे — Manohar Shimpi
क्या ज़रूरी है शब-ए-वस्ल में जागा जाए क्या ज़रूरी है हमेशा दिए जलते रक्खें — Asad Khan

शब-ए-वस्ल एक ऐसा शब्द है जो प्रेमियों के मिलन में पाई जाने वाली गहरी खुशी और संतोष को जागृत करता है। यह एक ऐसी रात का प्रतीक है जहाँ बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं और आत्माएँ एक सामंजस्यपूर्ण आलिंगन में मिल जाती हैं। यह शब्द पूर्णता और ऐसे क्षणों की क्षणभंगुर प्रकृति का भाव लिए हुए है।

कवि अक्सर शब-ए-वस्ल का उपयोग रोमांटिक संतोष की चरम सीमा को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह सपनों के साकार होने की रात है, जहाँ लालसा संतोष में बदल जाती है और जुदाई केवल एक दूर की स्मृति बन जाती है।

शब-ए-वस्ल प्रेम के अंतिम मिलन का सार पकड़ता है, मानव भावनाओं की बुनावट में एक क्षणिक फिर भी शाश्वत क्षण।