
तमाम रातें सुकून सारा चुरा के जानाँ कहाँँ को चल दी
सुनो शब-ए-वस्ल है हमारी जगा के जानाँ कहाँ को चल दी
हमारे पैरों पे पैर रख के खड़ी हुई थी गले लगाने
तुम्हारे पैरों लगी महावर लगा के जानाँ कहाँ को चल दी
— Anmol Mishra
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