Meaning of

शब-ए-विसाल

shab-e-visaal • شب وصال

मिलन की रात; संयोग की रात

night of union; night of meeting

وصل کی رات; ملاقات کی رات

Persian

शब-ए-फ़िराक़ हावी है शब-ए-विसाल पे ऐ दोस्त
सियाह रात में अब तक बदन को कोफ़्त होती है

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शब-ए-विसाल बहुत कम है आसमाँ से कहो
कि जोड़ दे कोई टुकड़ा शब-ए-जुदाई का

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शब-ए-फ़िराक़ पूरी रात सोना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम तिरे ख़याल बो रहे हैं हम

शब-ए-विसाल पूरी रात जगना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम सुकूँ की नींद सो रहे हैं हम

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बा'द-ए-शब-ए-विसाल से आगे की चीज़ है
ये ज़िंदगी मलाल से आगे की चीज़ है

क्या ही कहूँ ए दोस्त मैं उस के मिजाज़ का
वो शख़्स तो कमाल से आगे की चीज़ है

है प्यार मुझ को आप से कह तो सका नहीं
ये तो मेरी मजाल से आगे की चीज़ है

उस के रुमाल के सिवा तो कुछ है ही नहीं
लेकिन वो भी रुमाल से आगे की चीज़ है

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शब-ए-फ़िराक़ हावी है शब-ए-विसाल पे ऐ दोस्त
सियाह रात में अब तक बदन को कोफ़्त होती है

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शब-ए-विसाल बहुत कम है आसमाँ से कहो
कि जोड़ दे कोई टुकड़ा शब-ए-जुदाई का

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'शब-ए-विसाल' लंबे समय से प्रतीक्षित मिलन की गहरी भावनाओं को जगाता है। कविता में, यह वह रात है जब प्रेमी मिलते हैं, समय और स्थान की बाधाओं को पार करते हुए, एकता की गर्मजोशी में लिपटे हुए।

कवि 'शब-ए-विसाल' का उपयोग पूर्ति, लालसा की पराकाष्ठा और एकता में मिलने वाले आनंद के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह जुदाई की रातों के विपरीत है, एकता के आनंद को उजागर करता है।

'शब-ए-विसाल' मिलन के आनंद को समेटे हुए है, एक शाश्वत विषय जो काव्यात्मक आत्मा में गहराई से गूंजता है।