Meaning of

शब-भर

shab-bhar • شب بھر

पूरी रात; रात भर

all night; throughout the night

پوری رات; رات بھر

Persian

करवट बदल बदल कर सोचूँ तुम्हें मैं शब भर
तुम चैन से किसी के ख़्वाबों को बुन रहे हो

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कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता
हसीं है चाँद भी, शब भर मगर अच्छा नहीं लगता

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तन्हाइयाँ तुम्हारा पता पूछती रहीं
शब-भर तुम्हारी याद ने सोने नहीं दिया

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कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा

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शब भर इक आवाज़ बनाई सुब्ह हुई तो चीख़ पड़े
रोज़ का इक मामूल है अब तो ख़्वाब-ज़दा हम लोगों का

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सुब्ह की सैर की करता हूँ तमन्ना शब भर
दिन निकलता है तो बिस्तर में पड़ा रहता हूँ

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एक तरीक़ा बर्बादी का, हम ने यूँँ ईजाद किया
शब भर तन्हा-तन्हा रोए, मायूसी को शाद किया

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आँखें तब से रौशन हैं बोलो मैं क्या कर सकता हूँ?
वो शब भर देखा था कल तुम को मैं क्या कर सकता हूँ?

तुम कहती हो तुम को सुंदर केवल मैं ही कहता हूँ
अब सारी दुनिया अंधी है तो मैं क्या कर सकता हूँ?

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नींद आती नहीं मुझे शब भर
देख लेते मुझे वो गर पल भर

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इसी पर बैठ कर शब भर कहानी माँ सुनाती थी
तभी ख़ुशबू सी आती है मुझे इस चारपाई से

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करवट बदल बदल कर सोचूँ तुम्हें मैं शब भर
तुम चैन से किसी के ख़्वाबों को बुन रहे हो

3

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कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता
हसीं है चाँद भी, शब भर मगर अच्छा नहीं लगता

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'शब-भर' शब्द रात के शांत, चिंतनशील क्षणों को दर्शाता है। कविता में, यह समय के उस प्रवाह का प्रतीक है जो आकांक्षा या आत्मनिरीक्षण से भरा होता है। रात सपनों और अनकहे भावों के लिए एक कैनवास बन जाती है।

कवि अक्सर 'शब-भर' का उपयोग अंतहीन प्रतीक्षा या रात के दौरान महसूस की गई भावनाओं की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह रात की एकांतता और शांति को भी दर्शा सकता है, जो दिन के कोलाहल के विपरीत है।

रात की गोद में, 'शब-भर' आत्मा के शांत विचारों का एक माध्यम बन जाता है।