Meaning of

शाम-ए-अलम

shaam-e-alam • شام الم

दुःख की शाम; पीड़ा की संध्या

evening of sorrow; dusk of grief

غم کی شام; دکھ کی شام

Persian

कभी तो नस्ल-ओ-वतन-परस्ती की तीरगी को शिकस्त होगी कभी तो शाम-ए-अलम मिटेगी कभी तो सुब्ह-ए-ख़ुशी मिलेगी — Abul mujahid zaid

यह वाक्यांश दिन से रात में परिवर्तन के साथ आने वाली शांति और उदासी को दर्शाता है, जो दुःख में डूबने का प्रतीक है। कविता में, यह संध्या की उदासीन सुंदरता को पकड़ता है, जहाँ मद्धम होती रोशनी आशा के क्षीण होने का प्रतीक है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग व्यक्तिगत हानि के प्रतीक के रूप में शाम के भावनात्मक भार को दर्शाने के लिए करते हैं। यह दिन की चमक के विपरीत है, जो दुःख की अनिवार्यता को उजागर करता है।

शाम की शांत गोद में, दुःख अपनी आवाज़ पाता है। पीड़ा की संध्या एक अंत और एक आरंभ दोनों है।