Meaning of

शिकन

shikan • شکن

सिलवट; झुर्री; मोड़

crease; wrinkle; fold

شکن; جھری; تہ

Persian

है अब भी बिस्तर-ए-जाँ पर तिरे बदन की शिकन मैं ख़ुद ही मिटने लगा हूँ उसे मिटाते हुए — Azhar Iqbal
झोली मेरी ग़मों से भले भर दे ऐ ख़ुदा लेकिन जबीं पे उस के कभी इक शिकन न हो — Dipendra Singh 'Raaz'
नक़्श-ए-जाँ हो गई तहरीर शिकस्त-ए-उल्फ़त किस तरह वो मिरे माथे की शिकन को भूले — divya 'sabaa'
खिलाड़ी देवकीनंदन के जैसा सामने हो तो तजुर्बा लाख हो शकुनी भी चौसर हार जाते हैं — shashwat singh darpan
सोचो तो सिलवटों से भरी है तमाम रूह देखो तो इक शिकन भी नहीं है लिबास में — Shakeb Jalali
था मैं अय्यार भी वादा-शिकन बस उस से उल्फ़त थी मगर वो तो फ़रिश्ता था उसे सब से मुहब्बत थी — Brajnabh Pandey
तेरे रहते उस का चेहरा, कैसे शिकन ओढ़ सकता है? तू माँ है तो माँ होने का मतलब भी तो समझ सयानी — Shiva awasthi

शिकन उन सूक्ष्म रेखाओं को पकड़ती है जो समय और अनुभव सतहों पर उकेरते हैं, चाहे वह त्वचा हो या कपड़ा। कविता में, यह समय के गुजरने और आत्मा पर छोड़े गए निशानों का प्रतीक है। यह जीवन की अस्थिरता की कोमल याद दिलाती है।

कवि 'शिकन' का उपयोग उम्र बढ़ने और समय के गुजरने के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह अपूर्णता में पाई जाने वाली सुंदरता और हर झुर्री द्वारा बताई गई कहानियों को व्यक्त कर सकता है। यह शब्द अक्सर युवावस्था के विपरीत होता है, उम्र के साथ आने वाली बुद्धिमत्ता को उजागर करता है।

शिकन जीवन की यात्रा की सुंदरता का प्रमाण है, जहाँ प्रत्येक रेखा अपनी कहानी कहती है।