Meaning of

शोक

shok • شوق

शोक; दुःख; विलाप

grief; mourning; sorrow

غم; سوگ; افسوس

Sanskrit

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख — Allama Iqbal
तेग़-बाज़ी का शौक़ अपनी जगह आप तो क़त्ल-ए-आम कर रहे हैं — Jaun Elia
शौक़ है इस दिल-ए-दरिंदा को आप के होंठ काट खाने का — Jaun Elia
उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते — Bashir Badr
तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है — Charagh Sharma
तुम इस का नुक़सान बताती अच्छी लगती हो वरना हम को शौक़ नहीं है सिगरेट-नोशी का — Khurram Afaq
कोई तो पूछे मोहब्बत के इन फ़रिश्तों से वफ़ा का शौक़ ये बिस्तर पे क्यूँ उतर आया — Harsh saxena
हम हैं शौक़ीन पुरानी ही शराबों के दोस्त हम तो हैं ढलते हुए हुस्न पे मरने वाले — Aks samastipuri
निगाह-ए-शोख़ का क़ैदी नहीं है कौन यहाँ किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले — Aks samastipuri

शोक शब्द गहरे दुःख का भार लिए होता है, जो अक्सर हानि या विलाप से जुड़ा होता है। कविता में, यह व्यक्तिगत से परे जाकर मानव पीड़ा और सहानुभूति के सार्वभौमिक विषयों को छूता है।

कवि अक्सर 'शोक' का उपयोग गहरे नुकसान की भावना को जगाने के लिए करते हैं। यह किसी प्रियजन का विलाप हो सकता है, अधूरे सपनों का दुःख, या समुदाय का सामूहिक शोक। यह शब्द क्षणिक उदासी के विपरीत, एक गहरी, अधिक गूंजती हुई भावनात्मक अनुभव प्रदान करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'शोक' मानव भावना की गहराइयों को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है। यह दुःख के माध्यम से साझा यात्रा की याद दिलाता है।