Meaning of

शोख़

shokh • شوخ

शरारती; चंचल; जीवंत

mischievous; playful; lively

شوخ; چنچل; زندہ دل

Persian

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते — Bashir Badr
हरीम-ए-नाज़ के पर्दे में जो निहाँ था कभी उसी ने शोख़ अदाएँ दिखा के लूट लिया — Anwar Taban
फिर किसी के सामने चश्म-ए-तमन्ना झुक गई शौक़ की शोख़ी में रंग-ए-एहतराम आ ही गया — Asrar Ul Haq Majaz
उस के गालो की ख़ला से मेरा बोसा बिगड़ा है दूर रक्खें शोख़ बच्चो को सभी दीवार से — Raj
निगाह-ए-शोख़ का क़ैदी नहीं है कौन यहाँ किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले — Aks samastipuri
इलाही ने मुझे है शोख़ दी महबूब ये आँखें कभी मेरी नज़र से देख कितना ख़ूब-सूरत है — ATUL SINGH
दूर साहिल से कोई शोख़ इशारा भी नहीं डूबने वाले को तिनके का सहारा भी नहीं — Junaid Hazin Lari
शोख़ ने क्या ही ज़ुल्फ़ लहराई अज़-फ़लक बारिशें निकल आईं — Meem Maroof Ashraf

शोख़ युवा उत्साह और एक चंचल आत्मा की हल्केपन की भावना को समेटे हुए है। कविता में, यह अक्सर मासूमियत के आकर्षण और जीवंत बातचीत के आकर्षण को दर्शाता है।

कवि 'शोख़' का उपयोग छेड़छाड़ के सार और युवा आत्माओं के नृत्य को पकड़ने के लिए करते हैं। यह गंभीर स्वरों के विपरीत है, आनंद और जीवंतता की भावना लाता है।

कविता की दुनिया में, 'शोख़' जीवन के चंचल क्षणों का उत्सव है। यह हमें सहजता और जीवंत आदान-प्रदान में पाई जाने वाली खुशी की याद दिलाता है।