Meaning of

शौक़-ए-पैहम

shauq-e-paiham • اضطراب

निरंतर उत्साह; अविरल चाहत

continuous passion; relentless desire

مسلسل جوش; بے پناہ خواہش

Persian

बार बार उस के दर पे जाता हूँ हालत अब इज़्तिराब की सी है — Meer Taqi Meer
मिले इज़्तिराब-ओ-दर्द बस न लगे ये रोग तुम्हें कभी वो रहा क़रीब सदा मिरे न बिछड़ सके न मिले कभी — Ambar
हमें कल देख टी वी पर भला क्या सोच रोओगी यही बस सोच दिल से यार ये मलबा उतर आया — Raunak Karn

शब्द 'शौक़-ए-पैहम' एक अनवरत उत्साह और एक ऐसी चाहत का भाव जगाता है जो कभी मद्धम नहीं पड़ती। कविता में, यह एक ऐसे दिल की भावना को पकड़ता है जो हमेशा खोज में रहता है, कभी नहीं थमता, हमेशा तड़पता रहता है।

'शौक़-ए-पैहम' का उपयोग कवि अक्सर प्रेम या सत्य की निरंतर खोज को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक कलाकार के सृजन के प्रति अटल जुनून या एक प्रेमी की मिलन की अनंत खोज का प्रतीक हो सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'शौक़-ए-पैहम' मानव आत्मा के अटल उत्साह का प्रमाण है। यह हमें याद दिलाता है कि कुछ इच्छाएँ शाश्वत होती हैं।