Meaning of

सज़ा-ए-मौत

sazaa-e-maut • سزا موت

मृत्युदंड; फांसी की सजा

death penalty; capital punishment

سزائے موت; پھانسی کی سزا

Persian

जिस तरफ़ उस की निगाहें मुड़ गई
इक दफ़ा जैसे सज़ा-ए-मौत हो

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जन्नत में आ गया था किसी अप्सरा पे दिल
जिस की सज़ा-ए-मौत में दुनिया मिली मुझे

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तुम्हें हक है की सज़ा-ए-मौत दो हमें
हमारा हक है की पहले गुनाह साबित हो

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ज़हर मैं बे-वफ़ाई का कभी भी पी नहीं सकता
कलेजा फट गया ज़ख़्मों से उस को सी नहीं सकता

ख़ुदा क्यूँ फ़ैसला ऐसा मेरे ही साथ करना था?
सज़ा-ए-मौत दे दो पर जुदाई जी नहीं सकता

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मुंसिफ़ सुनो तुम, उम्र-भर की ये सज़ा कम ही लगे
इंसान को मिल मुफ़लिसी, है ये सज़ा-ए-मौत ही

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जिस तरफ़ उस की निगाहें मुड़ गई
इक दफ़ा जैसे सज़ा-ए-मौत हो

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जन्नत में आ गया था किसी अप्सरा पे दिल
जिस की सज़ा-ए-मौत में दुनिया मिली मुझे

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'सज़ा-ए-मौत' शब्द भारी और गंभीर भार वहन करता है, जो अंतिम दंड को संदर्भित करता है। कविता में, यह अक्सर भाग्य की अंतिमता, नियति की अपरिहार्यता और उसके बाद की गहरी चुप्पी का प्रतीक होता है।

कवि 'सज़ा-ए-मौत' का उपयोग न्याय, नैतिकता और अस्तित्वगत भय के विषयों में गहराई से उतरने के लिए करते हैं। यह न्याय के भय या अपरिहार्य अंत की शांति को जागृत कर सकता है। अक्सर, यह जीवन के साथ विरोधाभास करता है, अस्तित्व की क्षणभंगुर प्रकृति को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'सज़ा-ए-मौत' जीवन की अस्थिरता और अंतिम निर्णय की एक मार्मिक याद दिलाता है।