
ज़हर मैं बे-वफ़ाई का कभी भी पी नहीं सकता
कलेजा फट गया ज़ख़्मों से उस को सी नहीं सकता
ख़ुदा क्यूँ फ़ैसला ऐसा मेरे ही साथ करना था?
सज़ा-ए-मौत दे दो पर जुदाई जी नहीं सकता
— Aniket sagar
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